IAS Success Story: UPSC की परीक्षा में बार-बार असफल होने वाले रुशीकेश ने नहीं मानी हार, 5वीं बार में बनें टॉपर

Success Story Of IAS Topper Rushikesh Reddy: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की अनप्रिडेक्टिबिलिटी को नजदीक से देखना हो तो रुशीकेश का उदाहरण लिया जा सकता है. रुशीकेश ने एक दो नहीं पूरे पांच प्रयास के बाद इस परीक्षा में मनचाही सफलता पाई. बार-बार सफलता के बहुत नजदीक पहुंचकर असफल होने वाले रुशीकेश ने कभी हार नहीं मानी और लगातार कोशिशें करते रहें. इन पांच प्रयासों में कभी वे सभी चरण पास करने के बाद भी सेलेक्ट नहीं हुए तो कभी प्री में अटक गए. कुल मिलाकर उन्होंने इन सालों में इस परीक्षा की अनिश्चितता को जिया है. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में रुशीकेश ने अपना इन सालों का अनुभव साझा किया. जानते हैं आज उनकी जर्नी के बारे में.

आंध्र प्रदेश के हैं रुशीकेश

रुशीकेश मूलतः कड़प्पा, आंध्र प्रदेश के हैं और उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई भी यहीं हुई. पढ़ाई में हमेशा से अच्छे रुशीकेश ने स्कूल पूरा करने के बाद आईआईटी दिल्ली से ग्रेजुएशन किया और कुछ कारणों से यूपीएससी के क्षेत्र में आने का मन बनाया. यहां आकर उन्हें यह भी समझ आया कि हो सकता है आप जीवन के बाकी आयामों में खासकर एजुकेशन के विभिन्न क्षेत्रों में पहले आसानी से सफल होते आए हों लेकिन यूपीएससी के साथ भी ऐसा ही होगा इसकी कोई गारंटी नहीं है. इसका सटीक उदाहरण रुशीकेश हैं जो एक आईआईटीएन होने के बावजूद यूपीएससी परीक्षा में सफलता पाने को तरस गए.

पिछले अटेम्पट्स की कहानी

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रुशीकेश ने साल 2015 में दिल्ली आईआईटी से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया था. इसके बाद से उन्होंने यूपीएससी के अटेम्प्ट्स देना आरंभ कर दिया था. पहले अटेम्पट में उन्होंने तीनों चरण पास किए लेकिन इंटरव्यू में बीस अंकों से रह गए, परिणाम स्वरूप तीनों स्टेज क्लियर करने के बावजूद उन्हें कोई रैंक नहीं मिली. दूसरे अटेम्पट में वे मेन्स परीक्षा पास नहीं कर पाए. तीसरे अटेम्पट में उन्होंने तीनों स्टेज क्लियर की और उन्हें रैंक मिली 374. इस रैंक के अंतर्गत उन्हें इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस एलॉट हुई. पांचवें अटेम्पट के दौरान वे इसी सेवा में कार्यरत थे. हालांकि रुशीकेश अभी भी अपनी रैंक से संतुष्ट नहीं थे इसलिए उन्होंने फिर से अटेम्पट दिया और चौथी बार में सबसे बड़ा झटका उन्हें मिला जब वे प्री भी पास नहीं कर पाए. यहीं से आप समझ सकते हैं कि इस परीक्षा के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता. अंततः अपने पांचवें अटेम्पट में रुशीकेश ने 95वीं रैंक के साथ सफलता हासिल की.

देखें रुशीकेश द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू

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कोचिंग को नहीं मानते जरूरी

रुशीकेश इस परीक्षा में सफलता के लिए सबसे जरूरी सेल्फ स्टडी को मानते हैं. उनका कहना है कि इन सालों में उन्होंने कभी किसी कोचिंग की सहायता नहीं ली और न ही वे दूसरे स्टूडेंट्स को कोचिंग लेने की सलाह देते हैं. उनका कहना है कि अंततः सेल्फ स्टडी ही काम आती है इसलिए इस पर सबसे अधिक फोकस करें. अगर जरूरत लगे तो इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं क्योंकि कई बार परीक्षा की तैयारी के लिए न सभी संसाधन जुटा पाना संभव होता है न ही उसके चक्कर में पड़ना चाहिए. बीच में कहीं अटकें तो इंटरनेट की हेल्प ले सकते हैं. यहां आपको हर विषय के बारे में डिटेल में जानकारी मिल जाएगी.

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रुशीकेश की सलाह

रुशीकेश कहते हैं कि यह जर्नी किसी रोलर कोस्टर राइड जैसी होती है जहां आपको हर सिचुएशन के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए. वे कहते हैं उन्होंने ऐसे भी कैंडिडेट देखे हैं जो पांच अटेम्पट में प्री भी पास नहीं कर पाते और आखिरी में तीनों चरण पास कर लेते हैं. इसलिए रास्ते में आ रही बाधाओं या असफलताओं से घबराएं नहीं और लगातार कोशिश करते रहें. जो लोग यह परीक्षा पास कर चुके हैं उनकी सहायता लें और उनका अनुभव इस्तेमाल करें. नेट पर उपलब्ध टॉपर्स के ब्लॉग और वीडियोज का भी भरपूर इस्तेमाल करें. हर चीज आप खुद करके नहीं सीख सकते इसलिए बेहतर होगा दूसरों के अनुभव से सीखें. अंत में बस इतना ही की कोचिंग न ज्वॉइन करें पर टेस्ट सीरीज जरूर ज्वॉइन करें और जितने हो सके टेस्ट दें. इस परीक्षा में सफलता पाने का इससे अच्छा तरीका दूसरा नहीं है. चाहे कितनी भी रुकावटें आएं न घबराएं न कदम पीछे करें, कड़ी मेहनत और धैर्य से आप एक दिन मंजिल तक जरूर पहुंचेंगे.

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