IAS Success Story: 6 प्रयास, पांच में असफल लेकिन सौरभ ने नहीं हारी हिम्मत जब तक बन नहीं गए IAS ऑफिसर

Success Story Of IAS Topper Saurav Pandey: यूपीएससी का सफर हर कैंडिडेट के लिए अलग होता है. कोई जल्दी सफल होता है तो किसी को समय लगता है और किसी को बहुत ज्यादा समय लगता है. इस तीसरी कैटेगरी से संबंध रखते हैं सौरभ पांडे, जो एक या दो बार नहीं पूरे पांच बार यूपीएससी परीक्षा के किसी न किसी चरण में असफल हुए. पहली तीन बार में प्री परीक्षा नहीं निकली और बाकी के दो प्रयासों में इंटरव्यू राउंड तक पहुंचे लेकिन सूची में नाम नहीं आया. यह वो समय था जब सौरभ काफी हद तक निराश हो गए थे. लेकिन सकारात्मक लोगों के बीच रहने का फायदा उन्हें हुआ और वे अपने छठवें और अंतिम प्रयास में न केवल सेलेक्ट हुए बल्कि 66वीं रैंक के साथ टॉपर भी बनें. इस प्रकार सौरभ की सालों की मेहनत और धैर्य रंग लाया और वे आईएएस पद के लिए चुने गए. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में सौरभ ने अपने इन सालों के संघर्ष के बारे में खुलकर बात की.

यहां देखें सौरभ पांडे द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया इंटरव्यू – 


बार-बार हुए असफल –

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सौरभ मूलतः बनारस के रहने वाले हैं. उन्होंने बिट्स पिलानी से ग्रेजुएशन किया और उसके बाद जॉब करने लगे. नौकरी के कुछ समय बाद ही उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर जाने का विचार किया और यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी. 2014 में उन्होंने पहला अटेम्प्ट दिया था. इस साल और इसके बाद के दो सालों में भी सौरभ पहला चरण नहीं पास कर पाए. तीन अटेम्प्ट हो चुके थे और सौरभ को मेन्स लिखने का भी मौका नहीं मिला था. काफी प्रयास के बाद साल 2017 के चौथे अटेम्प्ट में सौरभ ने प्री, मेन्स दोनों क्लियर किए और साक्षात्कार तक पहुंचे पर फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आया. पांचवें अटेम्प्ट में भी यही हुआ. यह वो समय था जब सौरभ को लगने लगा था कि वह गलत फील्ड में आ गए हैं.

दोस्तों और परिवार के सहयोग से आगे बढ़े –

पांचवें अटेम्प्ट में साक्षात्कार तक पहुंचने के बाद भी चयन नहीं होने पर सौरभ ने यह क्षेत्र छोड़ने का फैसला लगभग ले लिया था. हालांकि रिजल्ट आने के बाद और अगला प्री का पेपर होने में बहुत कम समय बचा था. दोस्तों और परिवार के मोटिवेशन से सौरभ ने यह अटेम्प्ट देने की हामी भरी. ईश्वर ने सौरभ के लिए कुछ और ही योजना बनाई थी. जिस प्रयास में वे आगे बढ़ना ही नहीं चाहते थे उसी ने उनकी किस्मत पलटकर रख दी. साल दर साल फेल होने वाले सौरभ इस साल टॉपर बनें. सौरभ की जर्नी हमें सिखाती है कि जब लगे बस अब और नहीं होगा उसी समय थोड़ा सा और साहस दिखाने से बाजी पलट सकती है. अगर सौरभ यह प्रयास न करते तो कभी वहां नहीं पहुंचते जहां का सपना उन्होंने सालों देखा था.

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सौरभ की सलाह –

सौरभ का सफर दूसरे कैंडिडेट्स को यही शिक्षा देता है कि बार-बार मिलने वाली असफलताओं से घबराएं नहीं और निरंतर प्रयास करते रहें. एक बात का ध्यान रखें कि इस परीक्षा में पिछले अटेम्प्ट्स का कोई महत्व नहीं होता. अगर पिछला अटेम्प्ट बहुत अच्छा गया था तो कोई गारंटी नहीं कि अगला भी अच्छा ही जाएगा और अगर पिछला बुरा था तो इसका मतलब यह नहीं कि इसके आधार पर आपको अगला अटेम्प्ट नहीं देना है. हर अटेम्प्ट एकदम नया प्रयास होता है.

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निगेटिव लोगों से जहां तक संभव हो दूर रहें. परिवार और कुछ खास दोस्तों के संपर्क में रहें ताकि जब हिम्मत टूटने लगे तो वे साथ दें. बहुत परेशान हों तो अपने खास लोगों के साथ शेयर करें, मन में न रखें. अपने लिए बैकअप प्लान्स तैयार रखें, इससे स्ट्रेस कम होता है.

अंत में बस इतना ही कि जब लगने लगे कि अब नहीं संभल रहा है, उसी पल बस थोड़ा सा और थाम लें क्या पता सौरभ की तरह आपकी भी जिंदगी बदल जाए. अंत तक हिम्मत न हारने का फल किस कदर मीठा हो सकता है सौरभ इसका जीता जागता उदाहरण हैं.

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