IAS Success Story: बिना कोचिंग के पहले ही प्रयास में टॉप करने वाली अर्तिका ने शेयर की अपनी प्रिपरेशन स्ट्रेटजी

Success Story Of IAS Topper Artika Shukla: यूपीएससी में सफल होने वाले बहुत से कैंडिडेट्स के बारे में अभी तक हमने जाना है. कोई पढ़ाई में एवरेज था, कोई बिलो एवरेज तो कोई टॉपर. हमारी आज की कैंडिडेट अर्तिका शुक्ला तीसरी श्रेणी से संबंध रखती हैं. स्कूल से लेकर कॉलेज तक अर्तिका ने हमेशा हर क्लास में टॉप किया. ये समझिए वे जहां जाती थी, विजेता बनकर ही वापस आती थी.

यूपीएससी के क्षेत्र में आने के पहले अर्तिका ने एमबीबीएस और एमडी परीक्षाएं भी पास की हैं जो अपने आप में एक बड़ा अचीवमेंट है. तो डॉक्टर अर्तिका क्यों बनीं आईएएस ऑफिसर? ये और ऐसे बहुत से प्रश्नों का जवाब दिया उन्होंने दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में.

अर्तिका का एजुकेशनल बैकग्राउंड –

अर्तिका मूलतः वाराणसी की हैं और उनके घर में माता-पिता के अलावा दो भाई हैं. अर्तिका की शुरुआती शिक्षा होम टाउन में हुई लेकिन बाद में वे दिल्ली शिफ्ट हो गईं. अर्तिका के दो बड़े भाई गौरव और उत्कर्ष हैं. इन दोनों ने भी यूपीएससी परीक्षा पास की है. गौरव आईएएस ऑफिसर हैं और उत्कर्ष आईआरटीएस सेवा में हैं.

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अर्तिका ने मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया. इसके बाद जब वे पीजीआईएमईआर से एमडी कर रही थीं तब उन्हें आईएएस परीक्षा देने का सुझाव बड़े भाई गौरव ने दिया. अर्तिका ने एमडी बीच में ही रोककर यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी, जिसके लिए उन्होंने कोई कोचिंग तो नहीं ली पर उनके भाई ने उनकी बहुत मदद की. पढ़ाई में हमेशा से ब्रिलिएंट अर्तिका अपने पहले ही अटेम्पट में एआईआर 04 के साथ चयनित हो गईं.

यहां देखें अर्तिका शुक्ला द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू – 

 

प्री और मेन्स की तैयारी की साथ –

अर्तिका ने साल 2014 में यूपीएससी के लिए प्रिपरेशन शुरू की और वे मानती हैं कि ठीक से तैयारी की जाए तो एक साल इस परीक्षा की तैयारी के लिए काफी है. प्री और मेन्स के लिए उन्होंने साथ में प्रिपेयर करना शुरू कर दिया था. प्री परीक्षा के पहले प्री के लिए जैसे तीन घंटे पढ़ती थी तो उस समय मेन्स के लिए एक घंटे ही पढ़ीं.

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उनका मानना है कि अगर आपने क्लास 12 तक की एनसीईआरटीज़ पढ़ ली और अपने आस-पास हो रही घटनाओं पर पैनी निगाह रखी तो आप ये परीक्षा पास कर सकते हैं. इंग्लिश की तैयारी अच्छे से करें. न्यूज पेपर नियमित पढ़ें और प्री के पहले कम से कम 20 से 25 टेस्ट पेपर जरूर सॉल्व कर लें. इनसे अभ्यास तो होता ही है साथ ही अपनी कमियां भी पता चलती हैं.

मेन्स के लिए करें आंसर राइटिंग –

अर्तिका कहती हैं प्री के साथ ही मेन्स की तैयारी शुरू कर दें क्योंकि इसका सिलेबस बहुत बड़ा है. साथ ही अच्छे अंक लाने के लिए अपने आंसर्स को इंप्रूव करने की लगातार कोशिश करें. इसके लिए आंसर राइटिंग बेस्ट तरीका है. जहां तक बात ऑप्शनल की है तो वही विषय चुनें जिस पर आपकी पकड़ हो. अर्तिका ने मेडिकल साइंस चुना था.

जिन विषयों को परीक्षा में बहुत कम वेटेज़ दिया जाता है पर वे बहुत लेंदी और टाइम टेकिंग हैं उन्हें अर्तिका ने छोड़ दिया. हालांकि वे इसकी सलाह दूसरे कैंडिडेट्स को नहीं देती. अगर आपके पास समय है तो सिलेबस में लिखी एक-एक चीज तैयार करें. सेलेक्टिव स्टडी करके रिस्क न ही लें तो बेहतर है.

अर्तिका का अनुभव –

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अर्तिका कहती हैं टॉपर्स के इंटरव्यू देखें पर अपने हिसाब से अपनी स्ट्रेटजी बनाएं, किसी को आंख बंद करके फॉलो न करें. ये परीक्षा आपकी नॉलेज से ज्यादा आपके निश्चय, आपकी पर्सनेलिटी का टेस्ट है. तैयारी के दौरान कई बार डर लगेगा,  बुरा लगेगा ऐसा भी महसूस हो सकता है कि अच्छी भली जिंदगी छोड़कर क्यों इसमें कूद गए पर इससे घबराएं नहीं. ये एकदम नॉर्मल है और अधिकतर कैंडिडेट्स के साथ होता है. जब डर लगता है तभी हम और अच्छा करने के लिए प्रेरित होते हैं और सफलता मिलती है.

मेन्स का कोई पेपर खराब हो जाए तो उसे भूल जाएं और अगले पेपर में जान लगा दें. जो बुरा हो गया उसे बदल नहीं सकते लेकिन रोना रोकर बाकी पेपर भी खराब नहीं कर सकते. इसलिए आगे बढ़ें और दोगुने जोश से बची परीक्षा दें. इन कुछ छोटी लेकिन जरूरी बातों का शुरू से लेकर अंत तक ध्यान रखेंगे तो सफलता जरूर मिलेगी.

IAS Success Story: हर परीक्षा में फेल लेकिन UPSC में टॉपर, कुछ अलग ही था लक्ष्य का यह सफर  

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