IAS Success Story: बार-बार की असफलता से निराश राघव ने कभी कर लिया था UPSC छोड़ने का फैसला, फिर कैसे बनें वे टॉपर?

Success Story Of IAS Topper Raghav Jain: यूपीएससी परीक्षा के उतार-चढ़ाव और अनिश्चित्ता से हर कोई वाकिफ है. यहां सफलता कब मिलेगी और मिलेगी भी की नहीं कुछ नहीं कहा जा सकता. इस क्षेत्र में आने वाले कैंडिडेट्स ऐसी स्थितियों के लिए तैयार तो रहते हैं लेकिन जब कोई एक प्रयास में मेन्स तक पहुंचकर असफल हो और दूसरे प्रयास में प्री भी पास न कर पाए तो निराश होना स्वाभाविक है. कुछ ऐसा ही हुआ राघव जैन के साथ. राघव साल 2017 के अपने पहले प्रयास में प्री परीक्षा पास कर गए लेकिन मेन्स में अटक गए और अगले साल यानी 2018 में प्री ही पास नहीं कर पाए. इससे उन्हें बहुत निराशा हुई और उन्होंने भविष्य में एग्जाम न देने की योजना बनाई. खैर परिवार और दोस्तों के सपोर्ट से राघव उठ खड़े हुए और किस्मत का खेल देखिए कि जब वे परीक्षा नहीं देना चाह रहे थे उसी साल उनका चयन हुआ और 127 रैंक पाकर वे आईपीएस सेवा के लिए सेलेक्ट हुए. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में राघव ने परीक्षा की तैयारी के विभिन्न पहलुओं पर बात की.

एमबीए किया है राघव ने –

राघव के साथ सबसे अच्छी बात यह हुई कि उन्होंने अगला अटेम्प्ट देने के लिए खुद को मोटिवेट किया वरना वे यहां तक कभी नहीं पहुंचते. अगर उनके बैकग्राउंड की बात करें तो राघव लुधियाना के हैं और उनकी प्रारंभिक शिक्षा यहीं पूरी हुई. बारहवीं के बाद राघव ने बी.कॉम किया और उसके बाद एमबीए. पीजी करने के बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा देने की सोची और तैयारी के लिए कोचिंग करने दिल्ली आ गए. यहां उन्होंने 6 महीने ही गुजारे और परीक्षा के नेचर से भली-भांति परीचित होने के बाद लुधियाना लौट गए और बाकी साल वहीं रहकर तैयारी की.

दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में राघव जैन ने विस्तार से बात की –

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स्मार्ट स्टडी करें –

दूसरे कैंडिडेट्स से अलग राघव मानते हैं कि यूपीएससी का सिलेबस इतना बड़ा है कि अगर इसे पूरा करने बैठेंगे तो कभी तैयारी खत्म नहीं होगी. वे कहते हैं कि इस परीक्षा में पास होने के लिए आपको स्मार्ट स्टडी करनी है. जो क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं उन पर फोकस करना है और जो जरा भी टालने लायक हैं उन्हें छोड़ना है. इसके लिए बेस्ट तरीका है कि आप पिछले साल के प्रश्न-पत्र देखें और समझें की यूपीएससी का परीक्षा पैटर्न कैसा होता है और वे किसी विषय से किस प्रकार के प्रश्न पूछते हैं. लास्ट ईयर पेपर्स को राघव तैयारी के लिए बहुत अहम मानते हैं.

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हल्की पढ़ाई ने नहीं चलता काम –

राघव कहते हैं कि इस परीक्षा को पास करने के लिए आपको डीप नॉलेज चाहिए. लोग कहते हैं कि प्री की तैयारी करो तो मेन्स की खुद हो जाती है लेकिन ऐसा नहीं है. प्री परीक्षा की सफलता बहुत हद तक एलिमिनेशन सीखने, गेस वर्क करने और कॉमन सेंस लगाने से जुड़ी होती है. जबकि मेन्स के लिए किसी भी विषय की बहुत गहराई तक नॉलेज होनी चाहिए. इसलिए दोनों के हिसाब से अलग-अलग तैयारी करें. प्री के लिए खूब टेस्ट दें ताकी एलिमिनेशन टेक्नीक वगैरह सीख सकें क्योंकि प्री परीक्षा के अधिकतर प्रश्न किसी को नहीं आते. यहां बहुत हद तक कॉमन सेंस लगाना होता है और अधिक से अधिक प्रश्न करने होते हैं. अगर आप बहुत प्रश्न छोड़ेंगे तो भी सेलेक्ट नहीं होंगे. इसलिए दिए गए विकल्पों में से अगर एक के लिए भी श्योर हों तो वह प्रश्न जरूर अटेम्प्ट करें.

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मेन्स में रखें इन बातों का ध्यान –

राघव आगे कहते हैं कि एनसीईआरटी के बाद स्टैंडर्ड बुक्स से तैयारी करें और जब कुछ हद तक सिलेबस पूरा हो जाए तो आंसर राइटिंग प्रैक्टिस पर पूरा फोकस लगा दें. वे कहते हैं कि मेन्स के नंबर प्रेजेंटेशन से जुड़े हैं. कौन अपने उत्तरों को कितना प्रभावी और बेहतरीन ढ़ंग से लिख सकता है उसी के ऊपर वह अंक पाता है. इसलिए खूब अभ्यास करें और उत्तरों को इनरिच करना सीखें.

ऐस्से और एथिक्स को हल्के में न लें और इन पर भी बराबर फोकस करें. ये पेपर आपकी रैंक बना भी सकते हैं और बिगाड़ भी सकते हैं. उनके खुद के केस में दूसरे प्रयास में एथिक्स में बहुत ही खराब अंक थे. इन पेपरों की खास बात यह है कि हफ्ते का एक दिन भी अगर आप इन्हें दे रहें हैं, उसमें भी कुछ घंटे तो आप बढ़िया स्कोर कर सकते हैं.

अंत में बस इतना ही कि इस परीक्षा को पास करने के लिए धैर्य रखना बहुत जरूरी है. हाडवर्क विद स्मार्टवर्क करिए, कंसिसटेंट रहिए और पेशेंस रखिए, आप एक दिन जरूर सफल होंगे.

 

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