IAS Success Story: पहले ही प्रयास में चुनी गईं माधुरी, जानें उनकी स्ट्रेटजी और सफलता का सीक्रेट

Success Story Of IAS Topper Madhuri Gaddam: अभी तक हमने अक्सर उन टॉपर्स की सफलता की कहानियां सुनी हैं जो इस फील्ड में आने के बाद सालों मेहनत करते हैं और कई अटेम्प्ट्स देते हैं तब उनका चयन होता है. लेकिन हमारी आज की टॉपर की बात ही कुछ अलग है. वे अपने पहले ही प्रयास में न सिर्फ यूपीएससी सीएसई परीक्षा पास कर गईं बल्कि टॉपर भी बनीं. हम बात कर रहे हैं माधुरी गड्डम की. माधुरी ने साल 2017 की यूपीएससी सीएसई परीक्षा 144वीं रैंक से पास की और उन्हें इंडियन फॉरेन सर्विस एलॉट हुई. माधुरी के इस अचीवमेंट की एक और खास बात यह थी कि साल 2017 में उन्होंने इंटरव्यू में सेकेंड हाइऐस्ट मार्क्स पाए थे. माधुरी के इंटरव्यू में अंक आए थे 204 जो एक फर्स्ट टाइमर के लिए काफी बड़ी सफलता है. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में माधुरी ने इंटरव्यू क्रैक करने के खास टिप्स दिए.

इंट्रोडक्शन हो दमदार –

माधुरी कहती हैं की सामान्यतः साक्षात्कार की शुरुआत इंट्रोडक्शन से ही होती है. अगर इस समय लय बन जाए या जो एक औपचारिक सी जड़ता कमरे में होती है वह पिघल जाए तो आगे की राह आसान हो जाती है. वे सलाह देती हैं कि इसकी शुरुआत अगर किसी स्टोरी या आपका इस फील्ड में आने का क्या इंस्पिरेशन है जैसी बातों से हो जाए तो अच्छा रहता है. आपका कोई अनुभव या आपके जीवन में आया कोई सिविल सर्वेंट जिसने आपको यह राह चुनने के लिए प्रेरित किया जैसी बातों से बातचीत की शुरुआत की जा सकती है. इससे माहौल भी हल्का होता है बातचीत का एक फ्लो बनता है.

यहां देखें माधुरी गड्डम द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू

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बनाएं रखें अपना टेम्प्रामेंट –

माधुरी आगे कहती हैं कि बातचीत के दौरान कई बार ऐसे टॉपिक्स छिड़ जाते हैं कि माहौल भारी हो जाता है. वे अपना उदाहरण देती हैं कि किसी विषय पर बात होने के दौरान वे सब्जेक्ट के फेवर में बोल रही थी और वहां से लगातार काउंटर क्वैश्चन हो रहे थे. एक समय तो ऐसा आया कि माहौल काफी भारी हो गया था. ऐसे में वे अपने आप को कूल रखकर ही बात आगे बढ़ा रही थी. माधुरी कहती भी हैं कि कभी ऐसी सिचुएशन आए जो कि अक्सर होता है तो अपना कूल न खोएं. काम और कम्पोज्‍ड होकर बात करें. अपनी बात कहें पर उसे काटे जाने पर भड़के नहीं न ही अपनी आवाज का वॉल्यूम हाई करें और न ही इस बात से परेशान हों. जितना संयम आप दिखाएंगे वह आपके हक में जाएगा.

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अपने उत्तरों के सपोर्ट में सामग्री रखें तैयार –

इंटरव्यू में जब कोई बात कहें तो ध्यान रखें कि वह केवल आपका व्यू न होकर एक ऐसी बात होनी चाहिए जिसके सपोर्ट में कहने के लिए आपके पास बहुत कुछ हो. आप अपनी बात हवा में नहीं कह रहे बल्कि आपके पास फैक्ट्स, रिपोर्ट्स, एनालिसेस, डेटा आदि होगा तो आपकी बात का ज्यादा प्रभाव पड़ेगा. बोर्ड को भी लगेगा की आप तैयारी के साथ आए हैं.

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माधुरी एक बात और शेयर करती हैं कि कई बार हमें लगता है कि डैफ में हॉबी कॉलम से भी कुछ प्रश्न बनेंगे पर बहुत बार ऐसा भी होता है कि इससे कोई भी प्रश्न नहीं पूछा जाता. उनसे खुद से हॉबी पर एक ही प्रश्न नहीं पूछा गया. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि आपको इस सेक्शन की तैयारी नहीं करनी है. याद रखें कि डैफ में लिखा एक-एक शब्द आपको ठीक से तैयार करना है.

न कहने में कोई हर्ज नहीं –

अंत में माधुरी यही कहती हैं कि चाहे कोई भी कैंडिडेट कितनी भी तैयारी कर ले पर एक ऐसा टाइम जरूर आता है जब वह कुछ प्रश्नों के जवाब नहीं दे पाता. ऐसे में न घबराएं न ही परेशान हों और यह भी दिमाग में बैठा लें कि कुछ उत्तर न दे पाने का यह मतलब कतई नहीं है कि आपका साक्षात्कार खराब गया है या आपके अंक नहीं आएंगे. किसी प्रश्न का जवाब न आने पर न कहें और कांफिडेंस के साथ न कहें, इसमें कोई बुराई नहीं है. बस मोटे तौर पर यह ध्यान रखें कि शांति और तमीज के साथ बात करें लेकिन कांफिडेंट होकर. जो आता है उस पर अडिग रहें और जो नहीं आता उसके लिए सॉरी बोल दें. सॉल्यूशन ओरिएंटेंड बातचीत करें और बैलेंस्ड अपरोच के साथ आगे बढ़ें.

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