IAS Success Story: तीसरे प्रयास में तीसरी रैंक के साथ सचिन गुप्ता बनें IAS ऑफिसर, ऐसे पूरा किया सफर

Success Story Of IAS Topper Sachin Gupta: सचिन गुप्ता, सिरसा हरियाणा के हैं और उनकी शुरुआती पढ़ाई भी सिरसा में ही हुई है. काफी छोटी उम्र से सचिन यूपीएससी के क्षेत्र में जाने का सपना देख रहे थे, जिसके लिए उन्होंने तैयारी आरंभ की ग्रेजुएशन के बाद. इस क्षेत्र में सफलता पाने के पहले सचिन ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. स्नातक के तुरंत बाद ही वे तैयारियों में जुट गए और बहुत कोशिशों के बाद भी पहली बार में सूची में जगह नहीं बना पाए. इस असफलता से निराश होने के बजाय सचिन ने सीख ली और दूसरी बार और ज्यादा मेहनत से पढ़ाई की. नतीजा यह हुआ कि दूसरे प्रयास में सचिन का चयन हो गया. हालांकि रैंक कम आने के कारण उन्हें इंडियन लॉ सर्विस मिली जिससे सचिन बिलकुल संतुष्ट नहीं थे. उन्होंने फिर कोशिश की और इस बार न केवल सेलेक्ट हुए बल्कि ऑल इंडिया रैंक तीन भी हासिल की. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में सचिन ने शेयर की अपनी स्ट्रेटजी. पढ़ें यहां.

प्री परीक्षा की ऐसे करें तैयारी –

प्री परीक्षा के लिए सचिन का कहना है कि सबसे पहले तो बेसिक बुक्स पढ़ें और एनसीईआरटीज पर खास ध्यान दें. बिना बेस क्लियर करे आगे बढ़ेंगे तो सफर छोटा होने के बजाय लंबा हो जाएगा. इसके बाद स्टैंडर्ड बुक्स से तैयारी करिए और जब तैयारी एक स्तर पर पहुंच जाए तो मॉक टेस्ट जरूर दीजिए. अगर किसी कारण से आपके पास मॉक देने की सुविधा नहीं है या आप टेस्ट सीरीज ज्वॉइन नहीं कर सकते तो यूपीएससी के पिछले साल के पेपरों को हल कीजिए. कम से कम दस या पंद्रह साल के पेपर निकलिए और उन्हें सॉल्व कीजिए. इससे आप प्री परीक्षा के लिए जरूरी एलिमिनेशन टेक्नीक सीख जाएंगे. याद रखिए यह परीक्षा का पहला और महत्वपूर्ण चरण है जिसमें जरा सी लापरवाही अच्छे-अच्छे कैंडिडेट्स को बाहर का रास्ता दिखा देती है.

यहां देखें सचिन गुप्ता द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू – 

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मेन्स के लिए सिलेबस का हर शब्द होना चाहिए तैयार –

सचिन बात को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि प्री के बाद जब मेन्स की तैयारी पर आएं तो सिलेबस पर बहुत अधिक ध्यान दें. देखें कि किस विषय का क्या सिलेबस है और उसका एक-एक शब्द तैयार करें. सचिन कहते हैं कि अक्सर कैंडिडेट्स शिकायत करते हैं कि पता नहीं कहां से प्रश्न आ जाते हैं तो इसका जवाब यह है कि प्रश्न वहीं से आते हैं केवल आप उन पर गौर नहीं करते. जहां तक उनकी अपनी तैयारी की बात है तो सिलेबस में लिखे हर शब्द के न केवल सचिन ने तैयार किया था बल्कि उनके नोट्स भी बनाए थे. इससे उन्हें रिवीजन करने में आसानी हुई, जो इस परीक्षा को पास करने के लिए सबसे जरूरी एलिमेंट है.

अंत में सचिन यही कहते हैं कि परीक्षा के दौरान जब असफल हों तो इसे ईश्वर की मर्जी मानें और यह समझें कि अगर पूरी जी-जान लगा देने के बाद भी सेलेक्शन नहीं हुआ है तो भगवान ने आपके लिए कुछ और अच्छा सोचा होगा. इस जर्नी को एक लर्निंग प्रॉसेस समझें और चाहे जितना भी समय लगे पर परेशान न हों.

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एक बात और कि यूपीएससी परीक्षा पास करने का लक्ष्य रखना अच्छा है पर यह दुनिया का अंत नहीं. इसके अलावा भी बहुत सी सर्विसेस हैं जिनका चुनाव आप कर सकते हैं. कुल मिलाकर दिन के एंड में आपको आपका काम सैटिस्फाई कर रहा है या नहीं, यह जरूरी है.

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