IAS Success Story: तीन प्रयास, दो में सफल, ऐसे बनीं हिमाद्री कौशिक UPSC टॉपर

Success Story Of IAS Topper Himadri Kaushik: साल 2018 की टॉपर हिमाद्री कौशिक उन कैंडिडेट्स में से हैं जो पढ़ाई में हमेशा से अच्छे होते हैं. इनका स्कूल का रिकॉर्ड उठाकर देख लें या कॉलेज का, हर जगह हिमाद्री ने 90 प्रतिशत से ऊपर अंक ही पाए हैं. उनका सफलता का यह सफर यूपीएससी के क्षेत्र में आने के बाद भी बरकरार रहा. हिमाद्री ने यूपीएससी सीएसई के कुल तीन अटेम्प्ट्स दिए और दो में सेलेक्ट हुईं. दोनों ही बार हिमाद्री ने इंटरव्यू में काफी अच्छे अंक पाए. इसका फायदा यह हुआ कि हर बार उनकी रैंक इम्प्रूव हुई. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में हिमाद्री ने खास पर्सनेलिटी टेस्ट की तैयारी के विषय में चर्चा की.

इंजीनियर हैं हिमाद्री –

हिमाद्री ने साल 2015 में बिट्स गोआ से केमिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया और इसी साल यूपीएससी परीक्षा का पहला अटेम्प्ट भी दिया. चूंकि तैयारी बहुत अच्छी नहीं थी इसलिए वे प्री पास करके रह गईं. हालांकि पहले प्रयास में प्री परीक्षा पास करना ही अपने आप में बहुत बड़ी बात है. इसके बाद अगले ही साल उन्होंने अपना दूसरा अटेम्प्ट दिया. इस साल उन्होंने तीनों स्टेज क्लियर कर लिए और 304 रैंक के साथ सेलेक्ट हुईं. इसके अंतर्गत उन्हें इंडियन रेवेन्यू सर्विस एलॉट हुआ, जिसे हिमाद्री ने ज्वॉइन कर लिया. साल 2017 में उन्होंने ब्रेक लिया और अगला अटेम्प्ट 2018 में दिया जिसमें हिमाद्री ने टॉप किया.

यहां देखें हिमाद्री कौशिक द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू – 

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इन बातों का डर न लाएं मन में –

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हिमाद्री कहती हैं कि इंटरव्यू को लेकर कैंडिडेट्स के मन में कई तरह के मिथ हैं जिनमें से एक है भाषा को लेकर. उनका मानना है कि अपनी बात को ठीक से कनवे करना जरूरी है फिर आप वह हिंदी में कहें या इंग्लिश में, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. इसलिए भाषा को लेकर संकोच न करें. दूसरी जरूरी बात की यहां आपके ज्ञान की परख नहीं होती बल्कि आपकी ओवर ऑल पर्सनेलिटी टेस्ट होती है. इसलिए इससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी चीज पर ध्यान दें. हॉल में घुसने के बाद सभी को ग्रीट करें. पैनल में महिलाएं हो तो पहले उन्हें ग्रीट करें. जब बैठने को कहा जाए तभी बैठें, आई कॉन्टेक्ट बनाकर बात करें और बॉडी लैंग्वेज पर भी ध्यान दें. ये छोटी लेकिन जरूरी बातें ध्यान में रखें. इनसे आपका इंप्रेशन अच्छा पड़ता है.

न कहने का सही तरीका –

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हिमाद्री का कहना है कि चाहे कितनी भी तैयारी पक्की हो लेकिन कुछ प्रश्न हर किसी को अटका ही देते हैं. ऐसे में परेशान न हों बल्कि सहजता के साथ पैनल को न कह दें. इससे आपके नंबर नहीं कटते. फैक्ट्स और डेटा आदि याद न हों तो भी समस्या की बात नहीं. किसी चीज को लेकर आपका ओपीनियन क्या है वह मैटर करता है, उसे खुलकर रखें. अपनी बात कहते समय आवाज की टोन पर ध्यान दें और कोई कितना भी उकसाने की कोशिश करें पर शांति बनाएं रखें. किसी बात को कहते समय बहुत कड़ाई न दिखाएं कि ऐसा होता है या ऐसा नहीं होता, कुल मिलाकर फ्लैक्सिबल रवैया अपनाएं.

असहमित जताना सीखें और शालीनता के साथ उनकी बात के विपक्ष में बोलें. वहां किसी को जी हजूरी करने वाले लोग नहीं चाहिए बल्कि ऐसे लोग चाहिए तो कांफिडेंस के साथ अपनी बात रख सकें. पूरे साक्षात्कार के दौरान चेहरे पर हल्की स्माइल होने से अच्छा प्रभाव पड़ता है.

मॉक टेस्ट देना भी एक अच्छा तरीका है खुद को साक्षात्कार के लिए तैयार करने का. जैसे बाकी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मॉक देते हैं वैसे ही इंटरव्यू के लिए भी दें.

IAS Success Story: पहले दो प्रयासों में प्री परीक्षा भी पास न कर पाने वाली गुंजन तीसरे प्रयास में बनीं टॉपर, कैसे पाई उन्होंने यह सफलता? पढ़ें  

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