IAS Success Story: चार बार इंटरव्यू राउंड तक पहुंचकर रिजेक्ट होने वाले संदीप ने नहीं टूटने दी हिम्मत और ऐसे बनें UPSC टॉपर

Success Story Of IAS Topper Sandeep Kumar Meena: हमारे आज के टॉपर उन स्टूडेंट्स के लिए बहुत बड़ा प्रेरणास्त्रोत हैं जिन्हें लगता है कि एक बिलो एवरेज स्टूडेंट कभी यूपीएससी जैसी परीक्षा में सफल नहीं हो सकता. राजस्थान के छोटे से गांव दौसा के संदीप उन्हीं कैंडिडेट्स में से आते हैं जो अपनी स्कूल लाइफ से लेकर कॉलेज लाइफ तक कभी बहुत अच्छे स्टूडेंट नहीं रहे फिर भी उन्होंने आईएएस और आईपीएस जैसी सेवा में जाने का सपना देखा और अपनी हिम्मत और आत्मविश्वाश से उसे सच भी कर दिखाया. दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में संदीप ने अपने सफर के बारे में खुलकर बात की. आइये जानें विस्तार से.

 

हाईस्कूल के बाद बिगड़ा ट्रैक –

संदीप का जन्म और पालन-पोषण दौसा में ही हुआ. क्लास दस तक की शिक्षा भी उन्होंने यही ग्रहण की और इस स्टेज तक उनका ट्रैक रिकॉर्ड ठीक था. क्लास दसवीं फर्स्ट डिवीजन से पास करने के बाद संदीप को आगे की पढ़ाई के लिए जयपुर भेज दिया गया क्योंकि गांव में अच्छे स्कूल नहीं थे. यहां आकर संदीप की संगत बिगड़ी और घर से दूर आकर उनका मन पढ़ाई से हट गया. पढ़ाई का यह बिगड़ा क्रम ग्यारहवीं से लेकर ग्रेजुएशन अंतिम वर्ष तक चला. लगभग हर क्लास में उनके सेकेंड डिवीजन या और कम अंक आए. हालांकि इतने कम अंकों के बावजूद अपने चाचा की प्रेरणा से संदीप यूपीएससी के क्षेत्र में आने का मन बनाने लग गए थे. उनके चाचा भी यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे.

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परिवार को मनाना हुआ मुश्किल –

संदीप को जयपुर भेजने के बाद उनके प्रदर्शन में आयी गिरावट को देखते हुए उनका परिवार यूपीएससी की कोचिंग के लिए उन्हें दिल्ली भेजने को तैयार नहीं था. संदीप ने बड़ी कठिनाई से उन्हें मनाया और घरवालों के इन शब्दों के साथ दिल्ली आ गए कि अगर तुम वहां भी नहीं पढ़ते तो अपनी ही जिंदगी खराब करोगे. दरअसल परिवार जयपुर वाले अनुभव से डरा हुआ था. संदीप के कान में भी दिन-रात अपने किसान माता-पिता के ये शब्द गूंजते रहते. इस समय तक उन्हें यह अहसास हो गया था कि अब तक जो हुआ सो हुआ अब उन्हें सफलता पानी है और बचपन से मां जो अफसर बनने की शिक्षा देती थी उसे किसी भी हाल पूरा करना है.

देखें  संदीप कुमार मीना द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू

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बार-बार देखा असफलता का मुंह –

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संदीप कहते हैं कि हालांकि वे कभी अच्छे स्टूडेंट नहीं रहे फिर भी उनके अंदर एक अलग तरह का आत्मविश्वास था कि वे यह सबसे कठिन माने जानी वाली परीक्षा पास कर लेंगे. दिन-रात मेहनत करके वे अटेम्पट पर अटेम्पट देते गए और हर बार सफलता के एकदम नजदीक आकर असफल होते रहे. संदीप ने साल 2013 से परीक्षा देनी शुरू की और 2017 तक हर साल वे प्री, मेन्स पास करके इंटरव्यू राउंड तक पहुंचे पर सेलेक्ट नहीं हुए. इतने के बाद भी संदीप ने हार नहीं मानी और अपनी कमियों पर काम किया. अंततः साल 2017 में संदीप का सेलेक्शन हुआ और उन्हें उनका मनचाहा आईपीएस पद मिला. संदीप को यह सफलता पांचवें प्रयास में मिली.

संदीप की सीख –

संदीप कहते हैं कि इस परीक्षा को देने का जब मन बनाएं तो धैर्य के साथ आगे बढ़ने की कसम भी खाएं. चाहे कितनी भी बार असफल हों पर हिम्मत न हारें. वे अपना केस बताते हैं कि न जाने कितनी बार रिश्तेदार उन्हें और मां-बाप को ताना मारते कि कोई छोटी-मोटी नौकरी कर लो यूपीएससी तुम्हारे बस का नहीं, जहां बार-बार साक्षात्कार राउंड तक पहुंचकर बाहर हो जाते हो. संदीप कहते हैं उस समय मैं सोचता था कि इन्हें जवाब वक्त देगा. वे तय करके आए थे कि दिल्ली से खाली हाथ वापस नहीं लौटना है. बार-बार रिजेक्ट हुए पर कभी आत्मविश्वास में कमी नहीं आने दी. अपने अंदर अपने सपने को जीवित रखा. वे कहते भी हैं कि यूपीएससी एक ऐसा क्षेत्र हैं जो आपको आपके हार्डवर्क का फल एक न एक दिन जरूर देता है. इसलिए लगे रहें और कभी असफलता से घबराकर कदम पीछे न करें.

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