IAS Success Story: इंजीनियर से UPSC टॉपर बनने में लग गए कई साल पर चिराग जैन ने कभी नहीं मानी हार

Success Story Of IAS Topper Chirag Jain: डीग, राजस्थान के चिराग जैन को यूं तो यूपीएससी परीक्षा में फाइनल सफलता हासिल करने में करीब चार साल लग गए, लेकिन उनकी इस जर्नी की खास बात यह रही कि उन्होंने तीन अटेम्प्ट्स दिए और तीनों में प्री परीक्षा पास की. तीसरी बार के प्रयास में उनके सफर को मंजिल मिली जब साल 2019 की यूपीएससी सीएसई परीक्षा में वे 160वीं रैंक के साथ अंततः सफल हुए. रैंक के अनुसार उन्हें इंडियन पुलिस सर्विस एलॉट हुई यानी इंजीनियर चिराग बन गए आईपीएस ऑफिसर. चूंकि प्री परीक्षा का अच्छा अनुभव इस दौरान चिराग को हो गया था, इसलिए दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिए इंटरव्यू में चिराग ने खास प्री परीक्षा की तैयारी के विषय में बात की. आइये जानते हैं क्या सलाह दे रहे हैं चिराग जैन.

दस किताबें न रखें, एक किताब को दस बार रिवाइज करें –

प्री परीक्षा की तैयारी के विषय में बात करते हुए चिराग कहते हैं कि सबसे पहले तो बहुत अच्छे से सिलेबस देखें और इस काम में कतई जल्दबाजी न करें. सिलेबस देखने के बाद यह तय करें कि किस विषय की तैयारी के लिए कौन सी किताब आपको सेलेक्ट करनी है. अधिकतर बाजार में मिलने वाली स्टैंडर्ड बुक्स ही कैंडिडेट्स चुनते हैं. चिराग के अनुसार यही ठीक भी है अलग से सोर्स के चक्कर में न पड़ें.

अब आती है सबसे जरूरी बात कि कम से कम किताबें सेलेक्ट करें और उन्हीं से बार-बार पढ़ें. वे साफ कहते हैं कि एक विषय को दस किताबों से पढ़ने के बजाय एक किताब को दस बार पढ़ना इस परीक्षा को पास करने में सहायक सिद्ध होता है. इसलिए सोर्स सीमित रखें पर बार-बार उन्हें दोहराएं.

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मॉक टेस्ट सॉल्व करने की स्ट्रेटजी –

अगली जरूरी बात चिराग मानते हैं मॉक टेस्ट सॉल्व करना. वे कहते हैं कि पहले अटेम्पट के पहले उन्होंने करीब 60 मॉक दिए थे, दूसरे के पहले 30 या 32 और तीसरे के पहले समय कम था तो 10 या 12 मॉक ही दे पाए थे. चिराग के हिसाब से मॉक का मुख्य काम आपकी प्रैक्टिस कराने के साथ ही यह होता है कि इसकी सहायता से आप पेपर सॉल्व करने की सही तकनीक जान पाते हैं. दरअसल हर किसी का पेपर हल करने का तरीका फर्क होता है. कोई 80 प्रश्न करके फाइनल स्कोर एचीव कर पाता है तो तो कोई 90 प्रश्न से. इसी प्रकार कुछ लोग जब तक 100 प्लस प्रश्न नहीं करते तब तक वे फाइनल स्कोर पार नहीं कर पाते. ये टेस्ट आपके लिए यह नंबर पता करने में मदद करते हैं. देखें कि कितने प्रश्न हल करने से आपका चयन सुनिश्चित होता है. मेन परीक्षा वाले दिन उतने ही प्रश्न करें.

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देखें चिराग जैन  द्वारा दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया गया इंटरव्यू

ओएमआर भरते चलें –

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चिराग कहते हैं कि परीक्षा के दौरान समय की बहुत कमी रहती है. इसलिए प्रश्न हल करने के साथ ही ओएमआर शीट भरते चलें. वे कहते हैं कि कई बार स्टूडेंट एंड तक के लिए बैठे रहते हैं और अंत में देर हो जाने से ओएमआर भरने में गड़बड़ कर देते हैं. वे आगे बताते हैं कि किसी भी स्टूडेंट को परीक्षा में पूछे गए सभी प्रश्न नहीं आते. एक सर्टेन लेवल पर पहुंचने के बाद उसे गेस वर्क करना ही होता है. जैसे उनके तीन अटेम्प्ट्स में से तीनों बार वे केवल 50-55 प्रश्नों का ही उत्तर पूरी तरह जानते थे. बाकी इंट्यूशन या गेसवर्क होता था. वे कहते हैं जब इतने प्रश्न कर लें तो जिस प्रश्न में जिसे एलिमिनेट करना है वह करते चलें और उसे ओएमआर में मार्क भी कर दें. एंड टाइम तक बैठे रहने से केवल समय खराब होता है. जो उत्तर आपको शुरू में नहीं आ रहा वह अंत में भी नहीं आएगा.

चिराग अपनी बात को इस सलाह के साथ खत्म करते हैं कि इस परीक्षा में सफलता मिलने में कई बार समय लगता है लेकिन हिम्मत न हारें. वे कहते हैं मैंने ऐसे भी लोग देखें हैं जो पहले तीन अटेम्पट में प्री भी पास नहीं कर पाते और चौथे में फाइनल सेलेक्ट हो जाते हैं. इसलिए अपना मोटिवेशन हाय रखते हुए बार-बार प्रयास करें तब तक जब तक सफलता न मिल जाए.

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